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क्या पहाड़ के ये गांव खाली हो जाएंगे ? प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को मुख्यमंत्री ने दी हरी झंडी

देहरादून। पहाड़ में पलायन (Migration) की समस्या का समाधान निकालना पहले से ही हो रहा है, इस बीच जोशीमठ (Joshimath) के रैणी गांव (Raini Village) में आई आपदा से संवेदनशील इलाकों में रह रहे लोगों में डर का माहौल बन गया है. रैणी गांव के लोगों ने भी सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत (CM Trivendra Singh Rawat) से विस्थापन और पुनर्वास की मांग की है. 

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फिलहाल सीएम रावत ने चार जिलों में आपदा के अत्यधिक संवेदनशील प्रभावित परिवारों को एम ने परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन (Displacement)और पुनर्वास ( Rehabilitation) की अनुमति दी है. इसके लिए आपदा प्रबंधन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार मानक मदों के अनुसार धनराशि भी जारी करने की मंजूरी दी है.

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जानिए कौन से गांव होंगे पुनर्विस्थापित ?

टिहरी जिले (Tehri District ) के अत्यधिक संवेदनशील ग्राम बेथाण नामे तोक के चार प्रभावित परिवारों के विस्थापन-पुनर्वास नीति के तहत विस्थापित करने के राज्य स्तरीय पुनर्वास समिति की बैठक में पारित प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने अनुमोदित कर दिया है. इसके तहत चार परिवारों को नए स्थान पर पुनर्वास किया जाना है. इसके अलावा बागेश्वर (Bageshwar)के कपकोट के अंतर्गत अत्यधिक संवेदनशील ग्राम मल्लादेश के चार परिवार, चमोली (Chamoli) के तहसील थराली के आपदा प्रभावित अति संवेदनशील ग्राम फल्दिया गांव के 12 परिवार, गैरसैंण (Gairsain )के आपदाग्रस्त ग्राम सनेड लगा जिनगोडा के प्रभावित परिवारों को भी पुनर्वास के लिए अनुमति मिली, उत्तरकाशी (Uttarkashi) के तहसील डूंडा के अत्यंत संवेदनशील ग्राम अस्तल के 30 प्रभावित परिवारों को भी पुनर्वास के लिए सरकार से सहायता दी जाएगी.

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (IIT Roorkee)के सहयोग से भूकंप (Earthquak )पूर्व चेतावनी तंत्र के संचालन पर होने वाले व्यय के लिए 45 लाख जारी करने पर सहमति दी है. मुख्यमंत्री की सहमति के बाद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव एस.ए. मुरूगेशन की ओर से इसका जीओ भी जारी कर दिया गया है.

 

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