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उत्तराखंड मदरसों में ‘वंदे मातरम’ की गूंज, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष बोले- वतन की मोहब्बत हर धर्म से ऊपर

देहरादून: उत्तराखंड में मदरसों में ‘वंदे मातरम’ का पाठ शुरू किए जाने के निर्णय का उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और भाजपा नेता शादाब शम्स ने खुले दिल से स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत का उर्दू में प्रभावी अनुवाद तैयार करने के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें श्रेष्ठ अनुवाद प्रस्तुत करने वाले को पुरस्कृत किया जाएगा।

शादाब शम्स ने कहा कि मदरसा बोर्ड को भंग किए जाने के बाद अब शिक्षा विभाग द्वारा तय किए गए पाठ्यक्रम को मदरसों में लागू किया जा रहा है। इसके तहत अब मदरसों में वही सिलेबस पढ़ाया जाएगा जो राज्य के अन्य स्कूलों में लागू है। उन्होंने कहा कि यदि मदरसों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का पाठ भारत माता के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना जगाने के लिए किया जा रहा है, तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने संगीतकार ए.आर. रहमान की रचना ‘मां तुझे सलाम’ का उदाहरण देते हुए बताया कि यह गीत हर भारतीय को राष्ट्र प्रेम से भर देता है। साथ ही उन्होंने बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान द्वारा किए गए ‘वंदे मातरम’ के उर्दू अनुवाद का भी उल्लेख किया।

शादाब शम्स ने कहा, “मां की प्रशंसा करना और अपने मादरे वतन की तारीफ करना किसी भी तरह से गैर-इस्लामी नहीं है।” उन्होंने मुस्लिम उलेमाओं से अपील की कि वे राष्ट्रगीत का भावार्थ समझें, उसे उर्दू में अनुवादित कर व्यापक रूप से बच्चों को सिखाएं।

उन्होंने घोषणा की कि वक्फ बोर्ड ‘वंदे मातरम’ के सर्वश्रेष्ठ उर्दू अनुवाद के लिए एक विशेष प्रतियोगिता आयोजित करेगा। उनका कहना है कि यदि छात्रों को गीत का अर्थ उनकी भाषा में समझाया जाएगा, तो उसका प्रभाव और भी गहरा होगा।

 

‘वंदे मातरम’ गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था: ‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्र गीत है. इसे प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1882 में अपने उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित किया था. 1950 में ‘वंदे मातरम’ भारत का राष्ट्र गीत बनाया गया. राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ इस तरह है-

वन्दे मातरम्।

सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम्। वन्दे मातरम्॥’
‘शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्,
फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्, सुखदाम् वरदाम् मातरम्। वन्दे मातरम्॥
‘कोटि-कोटि कण्ठ कल-कल निनाद कराले,
कोटि-कोटि भुजोधृत खरकरवाले,
के बोले मां तु्मि अबले, बहुबलधारिणी नमामि तारिणीम्,
रिपुदलवारिणी मातरम्। वन्दे मातरम्॥’
‘तुमि विद्या तुमि धर्म,
तुमि हदि तुमि मर्म, त्वमहि प्राणः शरीर,
बाहुते तुमि मां शक्ति, हृदये तुमि मां भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गढि मन्दिरे-मन्दिरे। वन्दे मातरम्॥’
‘त्वमहि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी, कमला कमलदलविहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्, नमामि कमलाम्, अमलाम् अतुलाम्,
सुजलां सुफलां मातरम्। वन्दे मातरम्॥’
‘श्यामलाम् सरलाम् सुस्मिताम् भूमिताम्, धरनीम् भरनीम् मातरम्। वन्दे मातरम्॥’

 

– बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय-

आरिफ मोहम्मद खान ने राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ का उर्दू अनुवाद किया: बिहार के राज्यपाल और हिंदी, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी समेत अनेक भाषाओं के ज्ञाता हैं. आरिफ मोहम्मद खान एक प्रगतिशील मुस्लिम लीडर हैं. वो तीन तलाक के खिलाफ काफी मुखर रहे हैं. 1986 में शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को संसद द्वारा कानून बनाकर पलटे जाने के विरोध में उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. तब राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री थे. आरिफ मोहम्मद खान ने राष्ट्र गीत वंदे मातरम का उर्दू अनुवाद किया. उनके द्वारा किया गया अनुवाद इस तरह है.

तस्लीमात, मां तस्लीमात

तू भरी है मीठे पानी से
फल फूलों की शादाबी से
दक्खिन की ठंडी हवाओं से
फसलों की सुहानी फिजाओं से
तस्लीमात, मां तस्लीमात
तेरी रातें रोशन चांद से
तेरी रौनक सब्ज-ए-फाम से
तेरी प्यार भरी मुस्कान है
तेरी मीठी बहुत जुबान है
तेरी बांहों में मेरी राहत है
तेरे कदमों में मेरी जन्नत है
तस्लीमात, मां तस्लीमात
-आरिफ मोहम्मद खान, राज्यपाल, बिहार-

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