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क्राइम

28 लाख की ठगी मामले में बांग्ला में दर्ज है एफआईआर, ढूंढे नहीं मिल रहे भाषा के जानकार

काशीपुर| साइबर सेल रुद्रपुर में एक अपराधी के खिलाफ जांच इसलिए प्रभावित हो रही है क्योंकि पुलिस को बंगाली भाषा के जानकार नहीं मिल रहे. मामला कुछ यूं है कि पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार हुए साइबर ठग के खिलाफ दर्ज एफआइआर बंगाली भाषा में होने के चलते पुलिस की कार्रवाई प्रभावित हो रही है. पुलिस आरोपित के नाम और पते तक की तस्दीक नहीं कर पा रही है. पश्चिम बंगाल से कुंडेश्वरी पुलिस के पास एफआइआर तो पहुंच गई, लेकिन अब पुलिस को बंगाली भाषा के जानकार ढूढ़े नहीं मिल रहे हैं. जिसके चलते पुलिस को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

ओटीपी नहीं बल्कि सिम री-ईशू कर के ठगी को दिया अंजाम

20 नवंबर को नगर की आयोनेक्स केमिकल एंड इंजीनियरिंग फर्म के संचालक अनूप सिंह के मोबाइल से शाम चार अचानक सिग्नल गायब हो गए थे. उन्होंने 05:17 बजे संबंधित नेटवर्क कंपनी को फोन कर सिग्नल गायब हो जाने की शिकायत की. नेटवर्क कंपनी ने उन्हें बताया कि कोई छोटी-मोटी परेशानी हुई होगी, ठीक हो जाएगी. वह दोबारा से सिग्नल आने का इंतजार कर रहे थे कि इसी दौरान उन्हें पता चला कि उनके खाते से 27.75 लाख रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए गए हैं. यह जानकर अनूप सिंह हैरत में पड़ गए।कुंडेश्वरी चौकी पुलिस से मामले की शिकायत की गई तो पुलिस ने मामला साइबर सेल रुद्रपुर को ट्रांसफर कर दिया. सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को साइबर सेल ने अपनी रिपोर्ट दे दी है. जिसमें कहा गया कि ठगों ने रूमा नाम की महिला के खाते, दिनेश के खाते और सुखदेव के खाते में पैसा ट्रांसफर किया था और यह सभी खाते वेस्ट बंगाल के लोगों के नाम पर हैं. साथ ही एक और चौकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह ठगी ओटीपी पूछकर नहीं बल्कि सिम री-इशू करवाकर की गई थी.

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