देहरादून| पुलिस(Uttarakhand Police) के हाथ दो बड़ी सफलताएं लगी हैं. आज मंगलवार को एसएसपी(SSP) ऑफिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक योगेंद्र रावत ने मीडिया को जानकारी दी कि 3 साल पहले 2017 में हुए मसूरी में गैंग रेप(Gangrape) और हत्या(Murder) के मामले में एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया है. बता दें कि अपराधी नंदू पंडित साल 2017 मैं गैंगरेप का आरोपी बनने के बाद फरार चल रहा था. पुलिस ने नंदू पंडित एवं उसके तीन अन्य फरार साथियों पर 5000 रुपए का इनाम रखा था. घटना के पांच आरोपी 2017 में ही गिरफ्तार कर लिए गए थे. गैंगरेप के तीन आरोपी अभी भी फरार चल रहे हैं जिनकी शिनाख्त में की पुलिस लगी हुई है. प्रेस कॉंफ्रेंस के दौरान एसएसपी सिटी(SSP City) ने बताया कि गैंगरेप की घटना में शामिल होने के बाद नंदू पंडित बिहार(Bihar) चला गया था जहां पुलिस की गिरफ्त में आने के डर से वह पंजाब(Punjab) चला आया और पिछले 3 साल से जगह बदल बदल कर मजदूरी कर रहा था. गैंगरेप की घटना में सभी आरोपी बिहार से थे जो मजदूरी करने मसूरी आए थे पुलिस ने स्थानीय सूत्रों के माध्यम से नंदू पंडित के बारे में जानकारी इकट्ठे करते हुए उस पर कुछ समय नजर रखी और मौका मिलने पर गिरफ्त में ले लिया.
फर्जी एसडीएम बनकर ठगी करने वाले गिरोह का भी भांडाफोड़
एक अन्य मामले में भी देहरादून पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लगी है. 10 जनवरी को थाना प्रेम नगर में दर्ज हुए धोखाधड़ी के एक मामले में पुलिस ने मुख्य अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया है. पूरा मामला कुछ इस तरह है कि मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार श्रीवास्तव फर्जी एसडीएम(SDM) बनकर लोगों से ठगी कर रहा था साथी पंकज के साथ मिलकर वह लोगों को अपने अधिकारी होने का झांसा देकर विभिन्न मामलों में जैसे जमीन के सौदे या विवादित मामलों में पैसे लेकर निपटारे का दावा करता था. इसी में प्रेम नगर थाने में कोटा सत्तौर निवासी सौरभ बहुगुणा को जमीन के सौदे के नाम पर 1500000 रुपए का चुना लगाया गया. पीड़ित ने एफआईआर दर्ज करा कर पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अश्विनी कुमार को सुद्धोंवाला से गिरफ्तार कर लिया. अश्विनी ने पुलिस को बताया कि वह इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पढ़ा हुआ है और इससे पहले राजस्व विभाग में भी काम कर चुका है. पूरे मामले में अश्विनी के साथ कुछ और साथियों के भी नाम पुलिस को मिले हैं जिनकी तलाश की जा रही है. मामले में कुछ सरकारी नुमाइंदों के शामिल होने की भी आशंका जताई जा रही है.
