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गोवंश की जान बचाएगा लंपी प्रोवैक का टीका, टीके को तैयार करने में लगा तीन साल का समय

देश भर में उत्तराखंड, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के गोवंशों की मौत का कारण बन चुकी लंपी त्वचा रोग बिमारी का आखिरकार तीन साल रिसर्च करने के बाद मुक्तेश्वर आईवीआरआई और राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार के वैज्ञानिकों की टीम ने ” लंपी प्रोवैक ” टीका तैयार कर लिया है। यह एक स्वदेशी सजातीय टीका है। लंपी का टीका तैयार होने से अब गोवंशों में होने वाली लंपी की बिमारी से निजात मिल सकेगी। साथ ही पशुपालकों को आर्थिक रूप से भी नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

लंपी त्वचा रोग का टीका बनाने में मुक्तेश्वर आईवीआरआई और राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान हिसार के वैज्ञानिकों की टीम ने तीन साल तक इस बिमारी की रोकथाम के लिए रिसर्च करने के बाद लंपी प्रोवैक टीका तैयार किया।

लंपी प्रोवैक का टीका बनाने में आईवीआरआई मुक्तेश्वर के पॉक्स प्रयोगशाला प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. अमित कुमार, डॉ. करम पाल सिंह, डॉ. सुक्देब नंदी और निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त और राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार के डॉ. नवीन कुमार, डॉ. संजय बरूआ, डॉ. यशपाल और तत्कालीन महानिदेशक डॉ. बीएन त्रिपाठी शामिल रहे।

वैज्ञानिकों की टीम की ओर से तैयार लंपी प्रोवैक दवा की तकनीक को चार दवा कंपनियों को दी गई है। इसमें बायोवेट, इंडियन इम्यूनोलोजिकल्स, आईवीबीपी पुणे और हेस्टर शामिल हैं। कंपनियों की ओर से जल्द ही बाजार में उपलब्ध कराई जाएगी। इस दवा का प्रयोग चार माह से अधिक आयु के पशुओं पर किया जा सकता है। साथ ही वर्तमान समय में इस रोग के आपातकालीन रोकथाम के लिए आईवीआरआई मुक्तेश्वर की ओर से निर्मित गोट पॉक्स (बकरी चेचक) दवा का प्रयोग सभी प्रभावित राज्यों में किया जा रहा है।

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