लोकेश्वर सिंह ने 14 अक्टूबर 2025 को पुलिस सेवा से त्यागपत्र दे दिया है. वे अभी संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध राष्ट्रीय संगठन में हैं.
देहरादून: पिथौरागढ़ के टकाना क्षेत्र में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एक युवक को अवैध रूप से हिरासत में रखने और कथित रूप से नग्न कर मारपीट करने के मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी लोकेश्वर सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद उन्हें दोषी करार देते हुए उत्तराखंड शासन के गृह विभाग को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की संस्तुति भेजी है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि कार्रवाई शुरू करते समय उन्हें पर्याप्त सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाए।
मामला 8 फरवरी 2023 को दर्ज शिकायत से जुड़ा है, जिसमें पिथौरागढ़ निवासी लक्ष्मी दत्त जोशी ने आरोप लगाया था कि 6 फरवरी 2023 को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह और छह पुलिसकर्मियों ने उन्हें एसपी कार्यालय में अवैध रूप से हिरासत में रखकर बेरहमी से पीटा। पीड़ित के अनुसार, इस दौरान उन्हें नग्न कर शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिसके प्रमाण स्वरूप उसने मेडिकल और एक्स-रे रिपोर्ट प्रस्तुत कीं।
18 अप्रैल 2023 को अपने शपथ पत्र में लोकेश्वर सिंह ने इन आरोपों से इंकार करते हुए कहा था कि लक्ष्मी दत्त जोशी आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है और उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि 6 फरवरी को उनके साथ किसी प्रकार की मारपीट नहीं की गई।
वहीं 26 मई 2023 को पीड़ित ने पलटकर आरोप लगाया कि पूर्व एसपी ने पद का दुरुपयोग कर राजनीतिक प्रभाव के चलते उसके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करवाए। साथ ही यह भी कहा कि जिस दिन की घटना बताई गई है, उस दिन उसे केवल वाहनों में आगजनी के मामले में पूछताछ के बहाने बुलाकर प्रताड़ित किया गया था।
करीब तीन वर्षों तक चली सुनवाई के बाद बुधवार को न्यायमूर्ति एन.एस. धानिक की अध्यक्षता वाली बेंच—जिसमें सदस्य पुस्तक ज्योति, अजय जोशी, मोहन चंद्र और दया शंकर पांडे शामिल थे—ने अपना निर्णय सुनाया। बेंच ने पाया कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने पीड़ित को कार्यालय में बुलाकर गंभीर रूप से प्रताड़ित किया था।
उल्लेखनीय है कि लोकेश्वर सिंह 14 अक्टूबर 2025 को आईपीएस सेवा से इस्तीफा दे चुके हैं और वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध एक राष्ट्रीय संगठन में कार्यरत हैं।
