हरिद्वार: चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व के साथ ही हरिद्वार पूरी तरह भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंग गया है। सुबह की पहली किरण से पहले ही मनसा देवी मंदिर, चंडी देवी मंदिर और माया देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
मां के जयकारों से गूंजता हर कोना, घंटियों की मधुर ध्वनि और भक्तों की अटूट आस्था—पूरा माहौल अलौकिक और दिव्य नजर आ रहा है। खासकर माया देवी मंदिर, जिसे धर्मनगरी की अधिष्ठात्री शक्ति माना जाता है, वहां भक्तों की आस्था देखते ही बन रही है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से मां की आराधना कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। शिवालिक की वादियों में बसे मनसा देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों का उत्साह चरम पर है। कोई पैदल चढ़ाई कर रहा है तो कोई रोपवे से माता के दरबार तक पहुंच रहा है—हर किसी के चेहरे पर भक्ति और विश्वास की झलक साफ दिखाई दे रही है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महिषासुर के अत्याचारों से त्रस्त होकर देवताओं ने मां दुर्गा का आह्वान किया, तब मां ने दिव्य शक्ति से उसका संहार किया। इसी दिव्य शक्ति का एक स्वरूप मां मनसा देवी को माना जाता है, जो आज भी अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं।
नवरात्रि के नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है और यही विश्वास भक्तों को यहां खींच लाता है—कि सच्ची श्रद्धा से मांगी गई हर दुआ यहां जरूर कबूल होती है।
