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ग्राम प्रधानों का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, 10 सूत्रीय मांगों को लेकर विकास भवन में प्रदर्शन

देहरादून: जिला ग्राम प्रधान संगठन ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार को विकास भवन में प्रदर्शन किया। ग्राम प्रधानों ने सरकार से पंचायतों और प्रधानों से जुड़ी मांगों का जल्द समाधान करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान प्रधानों ने नारेबाजी कर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।

संगठन की प्रमुख मांगों में ग्राम प्रधानों का न्यूनतम मासिक मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये करना और सांसद-विधायकों की तर्ज पर ग्राम प्रधानों को भी विकास कार्यों के लिए निधि उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा वीबी-जी राम जी में श्रमिकों की ऑनलाइन उपस्थिति की बाध्यता समाप्त कर ऑफलाइन व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। प्रधानों ने अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 600 रुपये और कुशल श्रमिकों की मजदूरी 800 रुपये प्रतिदिन करने की भी मांग रखी।

ग्राम प्रधानों ने ग्राम पंचायतों को मिलने वाली राज्य और केंद्रीय वित्त की धनराशि बढ़ाने, जिला योजना में प्रधानों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा पंचायत राज एक्ट के तहत 29 विभागों को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने की मांग की।

संगठन के प्रदेश महामंत्री सुरेंद्र चौहान ने कहा कि ग्राम पंचायतों में आकस्मिक आपदा राहत के लिए अलग बजट की व्यवस्था होनी चाहिए और स्वीकृत विकास योजनाओं को तय समय सीमा में पूरा किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही ग्राम प्रधानों ने स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, प्रधानमंत्री आवास योजना की प्राथमिकता सूची में पात्र लाभार्थियों को शामिल करने और ग्राम पंचायतों पर प्रस्तावित टैक्स व्यवस्था में संशोधन की मांग भी उठाई।

संगठन का कहना है कि मांगों को लेकर सरकार को कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। प्रधानों ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

विधायकों और सांसदों की तरह निधि की मांग: प्रधान संगठन के प्रदेश संगठन मंत्री ने कहा कि-

हम पिछले तीन-चार महीने से इस कार्यक्रम में लगे हैं. हमने मंत्रियों और मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया है. हमारी 10 सूत्रीय मांगों में विधायक और सांसदों की तरह निधि उपलब्ध कराई जाए. जब दैवीय आपदा आती है तो ग्राउंड जीरो पर हम ग्राम प्रधान ही रहते हैं. ऐसे में किसी भी आपदा के दौरान ग्राम प्रधान तुरंत एक्शन ले सकते हैं. एक साल से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन कोई काम नहीं हुआ है. आगे हम पंचायत राज निदेशालय में धरना देंगे.
-सुरेंद्र चौहान, प्रधान संगठन के प्रदेश संगठन महामंत्री-

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