नई दिल्ली: भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी को नए आयाम देने की दिशा में महत्वपूर्ण वार्ता हुई। जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने मंगलवार को नई दिल्ली में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार, वैश्विक चुनौतियों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा की।
जर्मन विदेश मंत्री ने भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि जर्मनी इस समझौते का पूरा समर्थन करता है और यूरोपीय आयोग के साथ अपने प्रभाव का इस्तेमाल करेगा ताकि वार्ता तेजी से आगे बढ़ सके।
द्विपक्षीय व्यापार और सहयोग पर जोर
विदेश मंत्री जयशंकर ने बैठक के बाद कहा कि भारत और जर्मनी का द्विपक्षीय व्यापार पिछले साल लगभग 50 अरब यूरो तक पहुंच गया था। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा दोगुना हो सकता है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत जर्मन कंपनियों के लिए एक भरोसेमंद और स्थिर बाजार है। उन्होंने कहा, “हम Ease of Doing Business को और बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। जर्मन कंपनियों की चिंताओं को हल करने के लिए भारत विशेष ध्यान देगा।”
दोनों नेताओं ने विज्ञान और तकनीकी सहयोग पर भी चर्चा की। इस मौके पर जयशंकर ने बताया कि भारत-जर्मनी ने अपने वैज्ञानिक सहयोग के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं, जो आपसी रिश्तों की गहराई को दर्शाता है।
वैश्विक चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण
वार्ता में अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दे भी प्रमुख रहे। जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय आर्थिक अस्थिरता और राजनीतिक अनिश्चितता की दोहरी चुनौतियों का सामना कर रही है। भारत का मानना है कि रणनीतिक स्वायत्तता वाला बहुध्रुवीय विश्व ही इन चुनौतियों का सबसे बेहतर समाधान हो सकता है।
इस पर जर्मन विदेश मंत्री वाडेफुल ने भी सहमति जताई। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने के लिए एकजुट हैं। खासतौर पर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री व्यापार मार्गों की स्वतंत्रता दोनों देशों के लिए अहम है। वाडेफुल ने चीन के बढ़ते आक्रामक व्यवहार पर चिंता जताई और कहा कि इस क्षेत्र की सुरक्षा यूरोप की सुरक्षा से गहराई से जुड़ी हुई है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और सुरक्षा सहयोग
वाडेफुल ने रूस-यूक्रेन युद्ध को यूरोप की सुरक्षा नीति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी रक्षा, सुरक्षा और आयुध के क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने के इच्छुक हैं।
भारत की टेक्नोलॉजी ताकत की सराहना
जर्मन विदेश मंत्री ने भारत की तकनीकी प्रगति की तारीफ करते हुए कहा, “भारत अब एक इनोवेटिव पावरहाउस और टेक्नोलॉजी सेंटर बन गया है। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और लोकतंत्र होने के नाते भारत का सामरिक महत्व और बढ़ गया है।” उन्होंने अपने हालिया बेंगलुरु दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में तकनीकी नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति उन्हें बेहद प्रभावित कर गई।
भारत और जर्मनी के बीच हुई यह उच्चस्तरीय बैठक न केवल FTA को गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में भी दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। आने वाले महीनों में भारत-जर्मनी संबंध और गहराई पकड़ने की उम्मीद है, जिससे न केवल द्विपक्षीय व्यापार बल्कि वैश्विक रणनीतिक संतुलन को भी नई दिशा मिलेगी।
