लोकतंत्र (Democracy) में गांधी से नफरत करने की छूट है, उन्हें मानने की भी छूट है. यह एक तथ्य है कि स्वतंत्रता, स्वच्छता, जातिवादी-धार्मिक एकता और नशामुक्ति अभियानों से गांधी को कम से कम इस देश में अभी किनारे नहीं किया जा सकता.
न्यूज डेस्क| गांधी(Mahatma Gandhi) अपने आप में एक विचार है. महात्मा गांधी के जीवन के विभिन्न पहलुओं से हर किसी ने उन्हें अपनी समझ के अनुसार परखा है. इसकी बानगी आज भी देश में देखने को मिली. दिल्ली बॉर्डर पर बैठे किसानों ने राष्ट्रपिता गांधी की पुण्यतिथि(Death Anniversary) को सद्भावना दिवस के तौर पर मनाया वहीं कोटद्वार में सर्व धर्म प्रार्थना का आयोजन कर नशामुक्ति दिवस के तौर पर मनाया गया. कहीं पर इसे शहीद दिवस के तौर पर मनाया गया.
गांधी का जीवन अपने आप में इतनी विशालता समेटे हुए है चाहे उनके अनुयायी हों या धुर विरोधी, उनकी आवश्यकता को पूरी तरह नकारने में आज भी असक्षम हैं. स्वच्छ भारत अभियान में गांधी की प्रतीकात्मक उपस्थिति इस बात का सीधा संकेत है कि भारत में आज भी गांधी के आदर्श जिंदा हैं. गांधी की हत्या के पक्षधर हों या आलोचक, गांधी की और उनके विचारों की उपस्थिति इस देश के दोनों वर्गों के बीच हमेशा रही है.
26 जनवरी(Republic day) को दिल्ली(Delhi) में हुए हुड़दंग(Violence) के बाद किसानों(farmers) का गांधी की पुण्यतिथि को सद्भावना दिवस के तौर पर मनाना एक संदेश है कि हमारा उद्देश्य हिंसा नहीं था. हालांकि राजनीतिक परिपेक्ष्य में यह बात किसी सही बैठती है इसका निर्णय आने वाले वक्त में सरकार, किसान और माननीय सर्वोच्च न्यायालय की कमेटी(Supreme Court Committee) पर निर्भर होगा. लेकिन यह बात तय है कि गांधी आज भी इस देश में अहिंसा, त्याग की अटल प्रतिमा हैं. स्कूली किताबों में आज भी गांधी की जरूरत पड़ती है और स्वतंत्रता संग्राम(Independence Movement) की कहांनियां गांधी के बिना पूरी नहीं होती. चाहे उन्हें विलेन के तौर प्रस्तुत किया जाए, गांधी अपनी अहिंसा के दम पर आज भी उस कद को बनाए हुए हैं जो उन्होंने 30 जनवरी 1948 को गोली लगते वक्त तक बनाया था. लोकतंत्र (Democracy) में गांधी से नफरत करने की छूट है, उन्हें मानने की भी छूट है. यह एक तथ्य है कि स्वतंत्रता, स्वच्छता, जातिवादी-धार्मिक एकता और नशामुक्ति अभियानों से गांधी को कम से कम इस देश में अभी किनारे नहीं किया जा सकता.
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