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“ईद-उल-अजहा” उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, “ईद-उल-अजहा” क्यों मनाया जाता है…जानिए!

भारत में बकरीद (ईद-उल-अजहा) पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। यह पर्व पैगंबर इब्राहीम की अल्लाह के प्रति निष्ठा और बलिदान की भावना की स्मृति में मनाया जाता है।

बकरीद की शुरुआत विशेष ईद की नमाज़ (सलात-उल-ईद) से होती है, जो आमतौर पर सूर्योदय के 15-20 मिनट बाद अदा की जाती है। इसमें दो रकातें होती हैं, जिनमें पहले रकात में सात और दूसरे में पांच तकबीरें पढ़ी जाती हैं। नमाज़ के बाद खुतबा (उपदेश) दिया जाता है, जिसमें बलिदान, करुणा और समुदाय की एकता पर बल दिया जाता है।

इस पर्व का मुख्य अनुष्ठान कुर्बानी है, जिसमें बकरे या अन्य जानवर की बलि दी जाती है। बलि का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है: एक हिस्सा गरीबों को, एक रिश्तेदारों को, और एक स्वयं के लिए।

मुंबई के जोगेश्वरी बकरा मंडी में, सफेद और कश्मीरी नस्ल के बकरे ₹65,000 से ₹70,000 तक में बिक रहे हैं, जो उनकी गुणवत्ता और पालन-पोषण की देखभाल को दर्शाता है।
मुंबई के मोहम्मद अली रोड, बायकुला, बांद्रा, अंधेरी वेस्ट, जोगेश्वरी और मलाड के मुस्लिम बहुल इलाकों में ईद बाज़ारों की रौनक देखते ही बनती है। यहां कपड़े, आभूषण, मेहंदी कलाकार और पारंपरिक व्यंजन जैसे बिरयानी, कोरमा, पाय और शीरखुरमा की भरमार है।

“ईद-उल-अजहा” की हार्दिक शुभकामनाएँ! अल्लाह आपकी कुर्बानी को स्वीकार करे और आपके जीवन में खुशियाँ लाए।”

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