देवभूमि से ‘योगभूमि’ की ओर उत्तराखंड ने रचा इतिहास.
योग नीति से राज्य में 13 हजार रोजगार के अवसर, पांच नए योग हब होंगे स्थापित.
देहरादून: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जहां औपचारिक रूप से योग नीति लागू कर दी गई है। प्रदेश की शीतकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर में आयोजित भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड योग नीति 2025 की अधिसूचना जारी की।
उत्तराखंड बनेगा योग और वैलनेस की वैश्विक राजधानी:
राज्य को देवभूमि के साथ-साथ योग और वैलनेस की वैश्विक राजधानी के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से यह नीति तैयार की गई है। योग नीति की तैयारी की प्रक्रिया वर्ष 2023 से शुरू हुई थी, जिसे अंतिम रूप देकर 28 मई 2025 को धामी कैबिनेट ने मंजूरी दी थी।
मुख्य लक्ष्य और प्रावधान:
साल 2030 तक 5 नए योग हब – जागेश्वर, मुक्तेश्वर, व्यास घाटी, टिहरी झील और कोलीढेक झील क्षेत्र में स्थापित होंगे।
मार्च 2026 तक सभी आयुष हेल्थ और वेलनेस सेंटर्स में योग सेवाएं अनिवार्य।
13,000 से अधिक रोजगार सृजन की उम्मीद – जिनमें 2,500 योग शिक्षक और 10,000 योग अनुदेशक शामिल होंगे।
योग निदेशालय की स्थापना – नीति के संचालन, निगरानी और अनुदान वितरण का प्रमुख निकाय होगा।
स्कूलों, कॉलेजों और होमस्टे तक पहुंचेगा योग
प्रदेश के स्कूलों और कॉलेजों में योग पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।
लाइव योग प्रसारण के जरिए छात्रों और आम जनता को जोड़ा जाएगा।
होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे और कॉरपोरेट सेक्टर में योग सत्र आयोजित किए जाएंगे।
अनुदान और सब्सिडी का भी प्रावधान:
पर्वतीय क्षेत्रों में नए योग केंद्र खोलने पर 50% या अधिकतम ₹20 लाख तक सब्सिडी।
मैदानी क्षेत्रों में 25% या अधिकतम ₹10 लाख तक की सब्सिडी।
योग और प्राकृतिक चिकित्सा में रिसर्च के लिए ₹10 लाख तक अनुदान, कुल ₹1 करोड़ निर्धारित।
अगले 5 वर्षों में ₹35 करोड़ का व्यय प्रस्तावित।
योग नीति के तहत तय किए गए लक्ष्य-
मार्च 2028 तक 15 से 20 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भागीदारी का लक्ष्य।
विशेष ऑनलाइन योग प्लेटफॉर्म शुरू किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
योग पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “उत्तराखंड की यह ऐतिहासिक योग नीति राज्य को न केवल स्वास्थ्य के क्षेत्र में सशक्त बनाएगी, बल्कि इसे विश्व पटल पर योग और आध्यात्म का प्रमुख केंद्र भी बनाएगी।”
