खटीमा: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जनपद अंतर्गत खटीमा क्षेत्र से एक सनसनीखेज साइबर ठगी का मामला सामने आया है। यहां नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) के रिटायर्ड मैनेजर को डिजिटल अरेस्ट कर ठगों ने 18 लाख रुपये हड़प लिए। पीड़ित व्यक्ति ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत खटीमा कोतवाली पुलिस से की, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कैसे दिया गया धोखे का जाल..
पीड़ित, जो खटीमा के चकरपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं, एक वर्ष पूर्व एनएचपीसी से मैनेजर पद से रिटायर हुए थे। उन्होंने अपनी तहरीर में बताया कि 4 सितंबर 2025 को उनके पास एक फोन आया। कॉलर ने खुद को दिल्ली स्थित केनरा बैंक और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़ा अधिकारी बताया। पीड़ित को कहा गया कि उनके खाते से मनी लॉन्ड्रिंग हो रही है और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उनके सभी खातों और संपत्तियों की जांच की जानी है।
ठगों ने और दबाव बनाने के लिए यह तक कह दिया कि “राहुल गुप्ता” नामक अधिकारी इस केस के मुख्य जांच अधिकारी हैं। व्हाट्सएप कॉल और फर्जी वर्चुअल कोर्ट का सहारा लेकर पीड़ित को यह विश्वास दिलाया गया कि उन्हें अदालत के आदेश के अनुसार अकेले ही जांच में सहयोग करना होगा।
18 लाख रुपये का ट्रांसफर
डर और दबाव के माहौल में फंसे रिटायर्ड मैनेजर से कहा गया कि उनके सबसे बड़े बैंक खाते की जांच “सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट” में ट्रांसफर करके की जाएगी। इसके लिए उन्हें आरटीजीएस के माध्यम से 18 लाख रुपये एक निर्दिष्ट खाते में भेजने को कहा गया।
ठगों के दबाव में आकर 6 सितंबर 2025 को पीड़ित ने अपने एसबीआई चकरपुर खाते से इंडसइंड बैंक, गोमती नगर स्थित “ओम संस्कृति गोल्डन इंटल प्राइवेट लिमिटेड” नामक फर्जी खाते में 18 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। पैसे भेजने के बाद जब पीड़ित ने कॉल बैक करने की कोशिश की तो सभी नंबर स्विच ऑफ हो गए। तभी उन्हें अहसास हुआ कि वे साइबर ठगों के शिकार हो गए हैं।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई..
पीड़ित ने तुरंत खटीमा कोतवाली पहुंचकर तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही साइबर सेल की मदद से ठगों के बैंक खातों को होल्ड करवाया गया है, जिससे राशि को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है।
खटीमा कोतवाल मनोहर सिंह दसौनी ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि –
“पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साइबर ठगी के मामलों में जनता को जागरूक रहना चाहिए और किसी भी स्थिति में ऐसे कॉल्स के झांसे में नहीं आना चाहिए।”
डिजिटल अरेस्ट: नया साइबर हथकंडा
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में “डिजिटल अरेस्ट” नामक ठगी का यह तरीका तेजी से बढ़ा है। इसमें ठग खुद को CBI, ED, NIA या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और फर्जी कोर्ट, नोटिस या जांच का हवाला देकर पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।
साइबर सेल और पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या व्हाट्सएप मैसेज पर भरोसा न करें। किसी सरकारी एजेंसी की जांच या गिरफ्तारी केवल लिखित नोटिस और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में होती है, न कि ऑनलाइन कॉल्स के जरिए। ऐसी स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करके साइबर क्राइम हेल्पलाइन को सूचित करें और निकटतम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं।
