उत्तरकाशी: FAMEX 2026 वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर के अंतर्गत जनपद आपातकालीन परिचालन केंद्र, उत्तरकाशी में National Disaster Response Force के तत्वावधान में एक दिवसीय संयुक्त कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य आगामी मानसून सत्र एवं चारधाम यात्रा के दौरान आपदा प्रबंधन तैयारियों को मजबूत करना तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था।
कार्यशाला का शुभारंभ आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं की उपस्थिति में हुआ। इस दौरान एनडीआरएफ के सहायक सेनानी एस राजू घापोला एवं निरीक्षक संजय कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए आपदा के दौरान एनडीआरएफ की भूमिका, रेस्क्यू उपकरणों के उपयोग तथा मानसून में भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने जैसी घटनाओं से निपटने की रणनीतियों की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यशाला में चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु एनडीआरएफ द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला गया। साथ ही सभी रेस्क्यू एजेंसियों से आपसी सहयोग एवं बेहतर समन्वय बनाए रखने की अपील की गई।

State Disaster Response Force की ओर से मुख्य आरक्षी दुर्गेश रतूड़ी ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आपदा के दौरान एसडीआरएफ की भूमिका, त्वरित प्राथमिक उपचार, सीपीआर, ऑक्सीजन थेरेपी और सुरक्षित निकासी प्रक्रिया की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कंट्रोल रूम से प्राप्त सूचनाओं को संबंधित विभागों तक शीघ्र पहुंचाने में एसडीआरएफ महत्वपूर्ण समन्वयकारी भूमिका निभाता है।
आपदा प्रबंधन मास्टर ट्रेनर मस्तान भण्डारी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि जनपद आपातकालीन परिचालन केंद्र पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, पेयजल एवं अन्य विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर आपदा प्रबंधन कार्यों को प्रभावी बनाता है।
कार्यशाला में होमगार्ड, स्वास्थ्य, वन विभाग, जल संस्थान, विद्युत विभाग, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों को संचार प्रोटोकॉल, संसाधन प्रबंधन और सामुदायिक जागरूकता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।
समापन अवसर पर आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं ने सभी विभागों से मानसून एवं चारधाम यात्रा के दौरान पूर्ण सतर्कता और आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि FAMEX 2026 के तहत आयोजित इस प्रकार की कार्यशालाएं जनपद की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएंगी।
