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उत्तराखंड: मंत्री रेखा आर्या से रोजगार का सवाल पूछा, जवाब न मिला लेकिन PRD जवानों की चली गई ड्यूटी

देहरादून: उत्तराखंड में सरकार एक ओर युवा संवाद कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को प्रोत्साहित करने और राज्य को अग्रणी बनाने की बातें कर रही है, वहीं दूसरी ओर रोजगार को लेकर सवाल उठाने वालों पर कार्रवाई की खबर ने सबको चौंका दिया है। मामला ऊधमसिंह नगर जिले का है, जहां दो पीआरडी जवानों को महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या से रोजगार से जुड़ा सवाल पूछने पर ड्यूटी से हटा दिया गया।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में खटीमा में युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान कहा था कि राज्य को युवाओं की शक्ति से देश में नंबर वन बनाना है। लेकिन इसी बीच जिला युवा कल्याण विभाग की कार्रवाई ने संवाद की भावना पर सवाल खड़ा कर दिया है। जानकारी के अनुसार, पांच अक्टूबर को मंत्री रेखा आर्या फूलसुंगा और ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में 125 करोड़ की लागत से बन रहे कामकाजी महिला छात्रावास का निरीक्षण करने पहुंची थीं।

इसी दौरान ट्रांजिट कैंप में तैनात पीआरडी जवान बाबू खान (निवासी शहदौरा, किच्छा) और वीरेंद्र सिंह (निवासी गदरपुर) ने मंत्री से सवाल किया कि, “मैडम, आपने तीन साल पहले पीआरडी जवानों को 300 दिन रोजगार देने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक वह वादा कब पूरा होगा?”

मंत्री ने उस समय इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया और निरीक्षण आगे बढ़ा। लेकिन बताया जा रहा है कि मंत्री के लौटने के कुछ घंटे बाद ही जिला युवा कल्याण विभाग की ओर से दोनों जवानों की ड्यूटी समाप्त करने का आदेश भेज दिया गया। अगले दिन जब दोनों जवान ड्यूटी पर पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि विभाग ने उन्हें “प्रथक” कर दिया है।

पीआरडी जवान बाबू खान ने बताया कि यह सब सवाल पूछने की वजह से हुआ है। उन्होंने कहा, “हमने सिर्फ रोजगार को लेकर सवाल किया था, कोई गलत बात नहीं कही। अब दीपावली के समय घर बैठने को मजबूर हैं। परिवार की चिंता सता रही है।” दोनों जवानों का कहना है कि उन्हें रोजाना 620 रुपये मानदेय मिलता था और सालभर में मुश्किल से दो से छह महीने ही ड्यूटी मिल पाती थी।

बाबू खान और वीरेंद्र सिंह दोनों ट्रांजिट कैंप में मंत्री के स्कॉट ड्यूटी पर तैनात थे। बाबू खान वाहन चलाने का काम भी करते हैं। लेकिन सवाल पूछने के बाद अब दोनों की ड्यूटी खत्म कर दी गई है।

पीआरडी जवानों का दर्द यह भी है कि साल 2022 में मंत्री रेखा आर्या ने घोषणा की थी कि पीआरडी जवानों को साल में 300 दिन का रोजगार दिया जाएगा, जिससे उन्हें स्थायी आय का साधन मिल सके। लेकिन तीन साल बीतने के बावजूद यह वादा आज तक पूरा नहीं हुआ।

इस कार्रवाई के बाद अब स्थानीय स्तर पर विभागीय रवैये की आलोचना हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि “संवाद” का मतलब सिर्फ एकतरफा बातें सुनना है, तो फिर युवाओं की आवाज़ कौन सुनेगा? दीपावली से पहले दो जवानों की रोज़ी-रोटी छिन जाना निश्चित ही संवेदनशील मामला बन गया है।

 

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