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उत्तराखंड पंचायत चुनाव: देवरानी-जेठानी बनीं पंचायत की मुखिया, चार दशक से पंचायत पर एक ही परिवार का भरोसा कायम

गांव ने अपनाई अनोखी लोकतांत्रिक परंपरा, निर्विरोध चुनी गईं प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य.
सास-बहू के बाद अब देवरानी-जेठानी की जोड़ी सुर्खियों में, गांव की जनता ने फिर जताया भरोसा.

पिथौरागढ़: जिले के बेरीनाग विकासखंड से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित रीठा रैतौली गांव ने एक बार फिर लोकतंत्र की मिसाल पेश की है। यहां त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के तहत ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से एक ही परिवार की देवरानी को ग्राम प्रधान और जेठानी को क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्विरोध चुन लिया है।

गांव के बुजुर्ग बाला दत्त धारियाल के छोटे बेटे प्रमोद धारियाल की पत्नी निशा धारियाल को दूसरी बार ग्राम प्रधान और बड़े बेटे उमेश धारियाल की पत्नी जानकी धारियाल को क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्विरोध चुना गया। निशा और जानकी आपस में देवरानी-जेठानी हैं।

करीब 800 की आबादी वाले इस गांव में पंचायत नेतृत्व की कमान लंबे समय से एक ही परिवार के हाथ में है। बाला दत्त धारियाल वर्ष 1980 से 2003 तक ग्राम प्रधान रहे। इसके बाद उनकी पत्नी अंबिका धारियाल और बहू जानकी धारियाल ने पंचायत पदों को संभाला। वर्ष 2023 में अंबिका ग्राम प्रधान और जानकी क्षेत्र पंचायत सदस्य बनीं, तब इसे “सास-बहू की सरकार” कहा गया था, जबकि अब “देवरानी-जेठानी की सरकार” बनकर यह गांव फिर सुर्खियों में है।

ग्रामीणों के अनुसार, धारियाल परिवार पंचायत कार्यों के साथ-साथ अपने निजी संसाधनों से भी गांव के लिए काम करता है। छोटे-बड़े विवादों का हल गांव में आपसी सहमति से किया जाता है। एक दशक पहले तक जहां गांव में न सड़क थी न स्कूल, वहीं अब गांव हाईस्कूल और सड़क सुविधा से जुड़ चुका है।

निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष दीपिका बोहरा ने कहा कि रीठा रैतौली में निर्विरोध निर्वाचन यह दर्शाता है कि ग्रामीणों ने धारियाल परिवार के विकास कार्यों को सराहा और भरोसा जताया है। यही कारण है कि यह परिवार चार दशकों से गांव की सेवा में सक्रिय है।  यह गांव आज लोकतंत्र, सामाजिक सौहार्द और विकास का प्रेरणास्रोत बन गया है।

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