नई संपत्ति खरीद पर देनी होगी शासन को जानकारी, आय के स्रोत का भी करना होगा खुलासा, नियम न मानने पर होगी कार्रवाई.
देहरादून: उत्तराखंड सरकार लगातार “जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन” का दावा करती रही है, लेकिन राज्य के लोक सेवकों पर भ्रष्टाचार के आरोप समय-समय पर चर्चाओं में रहते हैं। ऐसे में मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने राज्य के सभी अधिकारियों को उत्तराखंड सरकारी सेवक आचरण नियमावली 2002 की याद दिलाते हुए एक कड़ा निर्देश जारी किया है।
मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अधिकारी नई संपत्ति की खरीद करता है, तो उसे इसकी जानकारी शासन को देनी होगी। साथ ही, उस संपत्ति को खरीदने के लिए खर्च किए गए धन का स्रोत (सोर्स ऑफ इनकम) भी स्पष्ट करना होगा।
पत्र में कहा गया है कि ऐसा देखा जा रहा है कि कई अधिकारी इन नियमों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं। इसलिए अब इन नियमों का पालन अनिवार्य किया जा रहा है, और उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य सचिव ने यह भी दोहराया कि सभी अधिकारियों को अपनी चल-अचल संपत्ति का वार्षिक विवरण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा। यह प्रावधान पहले से ही नियमों में है, जिसमें पहली नियुक्ति के समय, हर पाँच वर्ष में, और संपत्ति की खरीद-बिक्री की स्थिति में जानकारी देना जरूरी है। इसके अलावा, अधिकारियों को अपने परिवार की संपत्तियों का भी स्पष्ट विवरण शासन को देना अनिवार्य है।
उल्लेखनीय है कि राज्य में कुछ अधिकारियों की संपत्ति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, और कई बार ऐसे मामलों की जांच राज्य सतर्कता समिति तक भी पहुंची है। इस संदर्भ में मुख्य सचिव का यह पत्र सरकार की पारदर्शिता नीति को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
