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मनसा देवी मंदिर हादसा भगदड़ में 8 श्रद्धालुओं की मौत, सरकार ने धार्मिक स्थलों की व्यवस्था सुधारने का लिया फैसला

देहरादून: हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में भगदड़ मचने से 8 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हो गए। यह हादसा 27 जुलाई की सुबह उस वक्त हुआ जब मंदिर परिसर की सीढ़ियों पर करंट फैलने की अफवाह के चलते अफरा-तफरी मच गई। घायलों में कई बच्चे और महिलाएं शामिल हैं। घटना के बाद पूरे प्रदेश में शोक की लहर है।

हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार, 28 जुलाई को सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर व्यवस्थाओं को मजबूत और मुकम्मल बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसरों में मूलभूत सुविधाएं, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

सीएम धामी ने विशेष रूप से हरिद्वार के मनसा देवी और चंडी देवी मंदिर, टनकपुर का पूर्णागिरि धाम, नैनीताल स्थित कैंची धाम, अल्मोड़ा का जागेश्वर धाम और पौड़ी के नीलकंठ महादेव मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों का जिक्र किया। उन्होंने निर्देश दिया कि इन स्थलों पर श्रद्धालु पंजीकरण, पैदल मार्गों का चौड़ीकरण, अतिक्रमण हटाने और व्यवस्थाओं के समुचित विकास पर ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी प्रमुख मंदिरों के सुनियोजित विकास, श्रद्धालुओं की धारणा क्षमता में वृद्धि और व्यवस्थित दुकान प्रबंधन की भी बात कही। उन्होंने कहा कि दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का अनिवार्य पंजीकरण हो और भीड़ नियंत्रित रहे, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।

सीएम धामी ने मंडलायुक्तों की अध्यक्षता में समिति के गठन के निर्देश भी दिए, जिसमें जिलाधिकारी, एसएसपी, विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष और कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति स्थलों की स्थिति का मूल्यांकन कर जरूरी सुधार कार्यों को लागू करेगी।

वर्तमान में हादसे में घायल श्रद्धालुओं का ऋषिकेश स्थित एम्स सहित अन्य अस्पतालों में इलाज जारी है। सरकार ने पीड़ितों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।

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