केंद्र सरकार ने ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून के बिजली तंत्र को आधुनिक बनाने के लिए स्वीकृत किए 547.83 करोड़
हरिद्वार में 60% काम ही पूरा, 40% वर्षों से अधूरा; बिजली कटौती और फॉल्ट से परेशान जनता
चारधाम यात्रा और कुंभ क्षेत्र को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा है गंगा कॉरिडोर का बिजली ढांचा.
देहरादून: बनारस और हरिद्वार के बाद अब ऋषिकेश भी अंडरग्राउंड विद्युत लाइनों वाले शहरों की सूची में शामिल होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने ऋषिकेश के लिए 547.83 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। इसके तहत गंगा कॉरिडोर क्षेत्र में बिजली की लाइनों को भूमिगत किया जाएगा और ऋषिकेश, हरिद्वार एवं देहरादून में बिजली प्रणाली को स्वचालित (SCADA) किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है।
इससे पहले हरिद्वार में कुंभ मेले की तैयारियों के तहत मुख्य बाजार को ‘केबल मुक्त’ करने और अंडरग्राउंड केबलिंग का काम शुरू किया गया था। केंद्र ने उस समय 300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी थी और योजना की शुरुआत त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में हुई थी। लेकिन कई साल बीत जाने के बावजूद हरिद्वार में केवल 60% काम ही पूरा हो पाया है।
40% काम अधूरा रहने की वजह से हरिद्वार के मुख्य बाजारों में अब भी बिजली के तार लटकते नजर आते हैं, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को असुविधा होती है। विधायक मदन कौशिक और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित भी इस स्थिति को स्वीकार कर चुके हैं।
अधूरा काम सिर्फ दृश्य अव्यवस्था ही नहीं, बल्कि तकनीकी परेशानियां भी पैदा कर रहा है। बिजली विभाग के कर्मचारियों के मुताबिक अंडरग्राउंड केबल में फॉल्ट आने के बाद उसे ठीक करना बेहद मुश्किल हो जाता है। गायत्री विहार कॉलोनी के निवासी कुणाल का कहना है कि वे तीन महीने से हर हफ्ते करीब 20 घंटे बिजली कटौती झेल रहे हैं। शिकायत करने पर भी कोई स्थायी समाधान नहीं मिल रहा।
ऐसे में ऋषिकेश के लिए नए प्रोजेक्ट की घोषणा के साथ ही सवाल उठने लगे हैं कि क्या यहां भी हरिद्वार जैसी लापरवाही दोहराई जाएगी। खासतौर पर तब, जब हरिद्वार और ऋषिकेश दोनों ही चारधाम यात्रा और धार्मिक आयोजनों के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के केंद्र होते हैं और बिजली आपूर्ति का दबाव चरम पर होता है।
केंद्र और राज्य सरकार गंगा कॉरिडोर परियोजना को लेकर लगातार सक्रिय है। लक्ष्य है कि दोनों शहरों को व्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक बिजली नेटवर्क से जोड़ा जाए ताकि न सिर्फ आम नागरिकों बल्कि पर्यटन और धार्मिक यात्राओं में आने वाले श्रद्धालुओं को भी सुगम सुविधा मिल सके। हालांकि, अतीत के अनुभवों के आधार पर स्थानीय लोग उम्मीद के साथ-साथ चिंता भी जता रहे हैं।
अब निगाहें इस पर हैं कि ऋषिकेश में 547 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाता है या फिर यह भी हरिद्वार की तरह अधूरेपन और तकनीकी खामियों का शिकार बनता है।
