चमोली: चमोली से एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा का शुभारंभ हुआ है, जहां डिम्मर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर डिम्मर से गाडूघड़ा तेल कलश यात्रा विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना हो गई।
सोमवार प्रातः डिमरी पुजारियों के सानिध्य में “जय बदरी विशाल” के जयकारों के बीच यात्रा की शुरुआत हुई। मंदिर में महाभिषेक पूजा और बाल भोग अर्पित करने के बाद तेल कलश को लेकर श्रद्धालु आगे बढ़े। यात्रा के टटेश्वर महादेव मंदिर पहुंचने पर महंत योगेशानंद महाराज ने विशेष पूजा-अर्चना की। वहीं सिमली के विद्यापीठ में स्थानीय ग्रामीणों ने भजन-कीर्तन के साथ यात्रा का भव्य स्वागत किया।

केंद्रीय पंचायत के वरिष्ठ सदस्य गोवर्धन प्रसाद डिमरी और प्रकाश चंद्र डिमरी के अनुसार, यह यात्रा सिमली से कर्णप्रयाग होते हुए मां उमा देवी की पूजा के बाद विभिन्न पड़ावों—उमट्टा, लंगासू, नंदप्रयाग, चमोली, बिरही, पाखी और रविग्राम—से गुजरते हुए नृसिंह मंदिर ज्योतिर्मठ में रात्रि विश्राम करेगी।
आगामी कार्यक्रम के तहत 21 अप्रैल को यात्रा ज्योतिर्मठ से आगे बढ़कर पांडुकेश्वर स्थित योगध्यान मंदिर पहुंचेगी। इसके बाद 22 अप्रैल को गाडूघड़ा तेल कलश, भगवान उद्धव और कुबेर की डोली, आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी और रावल जी बद्रीनाथ धाम पहुंचेंगे।
23 अप्रैल को प्रातः 6:15 बजे बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही गाडूघड़ा तेल कलश और देव डोलियों को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।
इस धार्मिक यात्रा में डिमरी पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी सहित कई श्रद्धालु और गणमान्य लोग शामिल हैं, जो इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्रद्धा और उत्साह के साथ यात्रा में भाग ले रहे हैं।
