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ऋषिकेश एम्स हॉस्पिटल स्वास्थ्य सेवा के बजाय घोटालों का केन्द्र बनता, CBI ने अब तक 3 घोटालों में दर्ज किए हैं मुकदमे

देहरादून। दिल्ली तक नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भागने की जरूरत न पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाइ) के तहत ऋषिकेश में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का निर्माण किया गया। इसकी नींव 2 फरवरी 2004 को रखी गई थी और 2012 में यह संस्थान पूरी तरह स्थापित हुआ। धीरे-धीरे ओपीडी, आइपीडी और अन्य सर्जरी सुविधाएं शुरू हुईं।

लेकिन समय के साथ यह संस्थान स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय घोटालों की वजह से सुर्खियों में आने लगा। अब तक सीबीआई ने एम्स ऋषिकेश से जुड़े तीन प्रमुख घोटालों में मुकदमे दर्ज किए हैं।

करोड़ों के स्वीपिंग मशीन और मेडिकल स्टोर घोटाले का मामला

सीबीआई को सबसे पहले 2022 में स्वीपिंग मशीन और केमिस्ट स्टोर के आवंटन में अनियमितताओं की सूचना मिली। इस मामले में तत्कालीन प्रोफेसर, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया।

जांच के दौरान यह सामने आया कि रोड स्वीपिंग मशीन और केमिस्ट स्टोर के टेंडर आवंटन में लगभग 4.41 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। जांच में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर बलराम जी ओमर, एनाटॉमी विभाग के प्रोफेसर बृजेंद्र सिंह, सहायक प्रोफेसर अनुभा अग्रवाल, प्रशासनिक अधिकारी शशिकांत और लेखाधिकारी दीपक जोशी सहित पांच लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद चार्जशीट दाखिल की गई। इसके अलावा त्रिवेणी सेवा फार्मेसी के मालिक को भी षड्यंत्र में शामिल होने का आरोपी बनाया गया।

टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता

सीबीआई की जांच में यह सामने आया कि स्वीपिंग मशीन खरीदने के लिए एम्स में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी में बलराम जी ओमर, बृजेंद्र सिंह, अनुभा अग्रवाल, दीपक जोशी और शशिकांत शामिल थे।

जांच में पता चला कि निविदा प्रक्रिया में मानकों की अनदेखी करते हुए कमेटी ने योग्य कंपनी को बाहर कर अयोग्य कंपनी को टेंडर दे दिया। परिणामस्वरूप 2 करोड़ रुपये की मशीन खरीदी गई, जो केवल 124 घंटे ही चली। इसी तरह केमिस्ट स्टोर आवंटन में भी टेंडर प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ।

उन्नत वेसल सीलिंग उपकरणों की खरीद में घोटाला

एम्स ऋषिकेश में उपकरणों की खरीद में अनियमितताओं का दूसरा मामला अगस्त 2023 में सामने आया। जांच के दौरान पता चला कि 2019 में उन्नत वेसल सीलिंग उपकरणों के टेंडर प्रक्रिया में भारी वित्तीय अनियमितता हुई।

एम्स ने पहले इसी उपकरण को 19.90 लाख रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदा था। लेकिन बाद में मैसर्स रिया एजेंसीज से 7 उपकरण 54 लाख रुपये प्रति यूनिट की दर से कुल 3.83 करोड़ रुपये में खरीदे गए। जांच में यह भी सामने आया कि खरीदे गए उपकरणों का उपयोग 3 साल तक नहीं किया गया। इस घोटाले में लगभग 6.57 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

इस मामले में सीबीआई ने एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर बलराम जी ओमर, मैसर्स आरोग्य इंटरनेशनल, सुमन वर्मा, विश्ववीर वर्मा, मैसर्स रिया एजेंसीज और उनके साझेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

जांच और कार्रवाई

सीबीआई की टीम ने तीन फरवरी 2022 को एम्स ऋषिकेश में पहली दबिश दी। कार्रवाई सात फरवरी तक चली। इसके बाद 22 अप्रैल 2022 को टीम ने दस्तावेजों की जांच कर स्वीपिंग मशीन और मेडिकल स्टोर आवंटन में हुए 4.41 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया।

उन्नत वेसल सीलिंग उपकरणों के घोटाले में सीबीआई ने 31 मार्च 2023 को जांच की। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि करोड़ों रुपये की खरीद के बावजूद उपकरणों का सही उपयोग नहीं किया गया।

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