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सरकार से नहीं उम्मीद, कुदाल-फावड़े लेकर सड़क बनाने को श्रमदान में जुटे ग्रामीण

गैरसैंण|  2 दशक से एक अदद मोटर सड़क की मांग कर रहे ग्रामीणों का अंततः मंगलवार को धैर्य समाप्त हो गया। 12 वर्ष पूर्व स्वीकृत इस मार्ग को वित्तीय स्वीकृति के लिए हर सम्भव दरवाजे पर दस्तक देने के बाबजूद ग्रामीणों के हाथ कुछ भी नहीं लग सका। ऐसे में ग्रामीणों ने स्वयम सड़क निर्माण का फैसला लेते हुए तीन सप्ताह पूर्व सरकार व प्रशासन को प्रस्तावित आंदोलन से अवगत किया किन्तु इस चेतावनी पर भी ग्रामीणों को कोई जबाब नही मिला। घोषित कार्यक्रम के अनुरूप गणतंत्र दिवस की सुबह ही ग्रामीण फावड़े, कुदाल के साथ सडक निर्माण में जुट गए हैं। ग्रामीणों के इस आंदोलन में खनसर घाटी के तमाम पंचायत प्रतिनिधि समर्थन देने पहुचे हैं।

बताते चलें कि गैरसैंण ब्लॉक के खनसर घाटी में स्थित ग्राम पंचायत कालीमाटी, सेरा व तेवाखर्क के ग्रामीण लम्बे समय से मोटर सड़क की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2008 में तत्कालीन सरकार ने 3 किमी सड़क को स्वीकृति प्रदान की। जिस पर कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग ने सड़क का समरेखन कर वन विभाग के साथ प्रस्तावित सड़क में आने वाले बृक्षों की पातन प्रक्रिया पूरी की, किन्तु आस्वासनों के बीच लम्बी इंतज़ारी के वाबजूद कोई कार्यवाही नही होता देख गत वर्ष 27 फरवरी को खनसर घाटी के निवासियों ने तहशील मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन कर ग़ैरमियादी भूख हड़ताल सुरु की। मामले में क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने ग्रामीणों से वार्ता कर 3 माह का समय लेते हुए निर्माण सुरु किये जाने का लिखित आस्वासन दिया लेकिन 10 माह बाद भी एक इंच सड़क नहीं बन सकी। सरकार की खामोसी को ग्रामीणों की उपेक्षा बताते हुए 4 जनवरी को ग्रामीणों ने गैरसैंण के एसडीएम, थाना प्रभारी, लिनीवि अधिशासी अभियंता सहित विधायक व मुख्यमंत्री को 25 जनवरी तक स्वीकृत मार्ग पर कार्य सुरु किये जाने की मांग की। प्रेषित पत्र में तय समय पर सड़क निर्माण सुरु नहीं किये जाने पर श्रमदान कर सड़क खोदने व आसन की चेतावनी दी, जिस पर गणतंत्र दिवस पर ग्रामीणों ने ध्वजारोहण कर भूमिपूजन के पश्चात सड़क खुदाई सुरु कर दी।
इस मौके पर संघर्ष समिति अध्य्क्ष दयाल सिंह, प्रधान हेमा बिष्ट, उपाध्यक्ष कुँवर राम, सचिव हुक्म सिंह, महिला मंगल दल अध्य्क्ष रिंकी देवी सहित तीनों ग्राम पंचायत के महिला, पुरुष व बच्चे श्रमदान में जुट गए हैं।

 

 

 

 

 

 

 

सड़क नहीं होने की वजह कई बीमार लोग इलाज के अबाव में तोड़ चुके हैं दम

सड़क आंदोलन के पहले दिन श्रमदान में जुटे महिलाओं की अगुवाई कर रही प्रधान हेमा देवी ने बताया कि बीते डेढ़ दशक में दर्जन भर से अधिक गर्भवती महिलाओं व बुजुर्गो ने समय से अस्पताल नहीं पहुच पाने के चलते रास्ते मे ही दम तोड़ दिया। जब कि कई बीमार बुजुर्ग भी सड़क के अभाव में अस्पताल नहीं पहुच सके। महिला मंगल दल अध्यक्ष रिंकी देवी के अनुसार पूर्व प्रधान कलम सिंह बिष्ट, हिम्मत सिंह, दीवान सिंह, जीत सिंह, प्रताप सिंह, मदन सिंह, सोबन सिंह आदि को जहां समय से उपचार नहीं मिल सका वहीं गर्भवती हंसुली देवी, मानमती देवी, भागीरथी देवी, पुष्पा देवी की डंडी कंडी के ले जाते समय रास्ते मे मौत हो गई वही प्रियंका देवी व कविता देवी का मिस कैरेज हो गया। बतया कि स्कूल दूर होने व जंगली रास्ता होने के कारण छोटे बच्चों को भेजने से परिजन डरते हैं। जूनियर स्कूल 4 किमी दूर सेरा में है जब कि प्राथमिक स्कूल डेढ़ किमी दूर कालीमाटी के समीप है। बताया कि कई बार बच्चों ने रास्ते मे गुलदार देखे जाने की शिकायत की जिसके चलते माता पिता सहित ग्रामीण बच्चों की वापसी तक डरे सहमे रहते हैं।

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