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निजी स्कूलों की मनमानी बेलगाम, ‘ट्यूशन फीस’ को परिभाषित करे सरकार

  • एनएपीएसआर ने निजी स्कूलों को फीस वसूलने के खिलाफ मानव संसाधन विकास मंत्री व शिक्षा सचिव को दिया ज्ञापन

देहरादून| ट्यूशन फीस(Tuition Fees) के नाम पर मनमानी चला रहे निजी स्कूलों के खिलाफ नेशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंटस राइट्स (NAPSR) ने मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक व शिक्षा सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम को ज्ञापन दिया. निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस निर्धारित करने की छूट पर हाईकोर्ट(High Court) के निर्णय के बाद निजी स्कूल(Private school) अब सभी तरह की फीस को ट्यूशन फीस बताकर मनमाने तरीके से वसूल कर रहे हैं. NAPSR ने मांग की है कि सरकार सभी स्कूलों के सम्बंधित बोर्ड को ट्यूशन फीस परिभाषित करने के निर्देश पारित करे.

एसोसिएशन का कहना है कि उत्तराखंड शासनादेश संख्या 28/XXIV-B-5/05(01)2021 के आदेशानुसार सभी छात्रों से फीस लेने के लिए निजी स्कूलों को छूट दी गयी है. सिर्फ 15%- 20% छात्र ही अभी स्कूल जा रहे हैं और सरकार ने सभी छात्रों से फीस लेने की अनुमति निजी स्कूलों को दे दी है. ऐसे मे जो छात्र विभिन्न कारणों के कारण स्कूल जाकर शिक्षा नही भी ले रहे हैं स्कूलों द्वारा उन पर भी फीस को लेकर दबाव बनाया जाएगा जो कि न्यायोचित नही है. कोरोना काल मे राज्य सरकार एवं उच्च न्यायालय ने निजी स्कूलों को अभिभावकों से सिर्फ ट्यूशन फीस लेने की अनुमति प्रदान करी है किंतु सरकार व उन स्कूलों को मान्यता देने वाले सम्बंधित बोर्ड द्वारा ट्यूशन फीस परिभाषित नही किये जाने से निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से अपनी सम्पूर्ण मासिक फीस को ही ट्यूशन फीस बताकर मनमानी फीस वसूली की जा रही है और साथ ही कई स्कूलों ने फीस व्रद्धि भी करी है जबकि माननीय उच्च न्यायालय ने फीस व्रद्धि करने और ट्यूशन फीस के अलावा अन्य फीस लेने पर प्रतिबंध लगाया है किन्तु स्कूलों द्वारा मनमानी फीस अभिभावकों से वसूल कर उनका आर्थिक व मानसिक शोषण कर रहे हैं और जो बच्चे स्कूल नही भी गए हैं उनसे भी पूर्ण फीस वसूली की जा रही है तथा नए सत्र मे होने वाले एडमिशन से भी तीन माह की फीस व अन्य मदों मे शुल्क जमा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है.

NAPSR के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरिफ खान ने बताया कि निजी स्कूलों कह रहे हैं कि स्कूल अपने स्तर से कमेटी बनाकर जांच करेंगे कि अभिभावक वाकई मे पीड़ित हैं या नही. इस प्रकार की कोई जांच कमेटी बनानी है तो उसका अधिकार सरकार को है सरकार शिक्षा विभाग या अन्य किसी एजेंसी को यह जांच सुनिश्चित करे क्योंकि यदि स्कूल द्वारा बनाई गई जांच कमेटी जांच करेगी तो निश्चित तौर पर जांच प्रभावित होगी और अधिकांश जांच मे अभिभावक के फर्जी होने की पुष्टि होगी.

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