लोकसभा चुनाव के बीच हरियाणा की राजनीति में एकाएक हलचल बढ़ गई है। तीन निर्दलीय विधायकों ने पाला बदल लिया है। उन्होंने भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेकर कांग्रेस पार्टी के साथ खड़े होने की बात कही है। कांग्रेस पार्टी के नेता भूपेंद्र हुड्डा ने मांग की है कि प्रदेश में भाजपा सरकार, अल्पमत में आ गई है, इसलिए राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का कहना है, सरकार सुरक्षित है।
विधानसभा में 88 में से 40 विधायक भाजपा के हैं। कांग्रेस के पास 30 एमएलए हैं। जजपा के दस विधायक हैं। इनेलो और हरियाणा लोकहित पार्टी का एक एक विधायक है। छह सदस्य निर्दलीय विधायक हैं। इनमें से तीन विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन दिया है। दो भाजपा के साथ बताए जाते हैं। जजपा’ विधायकों के समर्थन से सरकार का गठन
हरियाणा में कांग्रेस और जजपा, दोनों दलों को एक दूसरे पर भरोसा नहीं है। पिछले वर्ष पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा था, विधानसभा चुनाव में एक समान विचारधारा वाले दल साथ आ सकते हैं। उनसे जजपा के साथ किसी तरह के गठबंधन को लेकर सवाल पूछा गया था। उस वक्त तक जजपा, भाजपा सरकार में शामिल थी।
पूर्व डिप्टी सीएम एवं जजपा नेता दुष्यंत चौटाला कहते हैं कि अगर कांग्रेस पार्टी, सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाती है, तो जजपा उसे बाहर से समर्थन देगी। प्रदेश की राजनीति को करीब से जानने वाले बताते हैं, समर्थन लेने देने की कहानी, अभी खत्म नहीं हुई है। हरियाणा में अभी हिसाब खुलना बाकी है। भाजपा सरकार गिराने के चक्कर में कहीं कांग्रेस और जजपा में तो सेंध नहीं लग रही। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस बाबत इशारा कर दिया है कि हमारे संपर्क में भी विधायक हैं।
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