हरिद्वार| शिक्षा नगरी रुड़की (Education hub Roorkee) के कृष्णा नगर, राजेन्द्र नगर समेत कई कॉलोनियों में विधुत विभाग (Electricity Department) की तरफ से बड़ी लापरवाही साफ तौर पर देखने को मिल रही है. क्षेत्र में कई कई गलियां ऐसी है जहाँ बिजली के तारों का जंजाल लगा हुआ है और जगह जगह बिजली के तार लटके हुए हैं जो किसी बड़े हादसे को न्यौता देते नज़र आ रहे हैं. स्थानीय लोगों (Local public) को भी डर बना हुआ है जिसकी लोगों ने मीडिया से गुहार लगाई है.
आपको बता दें कि रूड़की क्षेत्र में आबादी बढ़ने के साथ ही नई नई कॉलोनियां भी बस गयी हैं जिनमें लगातार लोग आकर बस रहे हैं. इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को विद्युत कनेक्शन (Electricity Connection) देने में विद्युत विभाग के सम्बन्धित अधिकारियों द्वारा भारी लापरवाही बरती गई है. तस्वीरों में आप साफ तौर पर देख सकते हैं कि बिजली के तार इतने नीचे लटके हुए है कि कोई भी बड़ी घटना कभी भी घट सकती है साथ ही हर गली में पर्याप्त बिजली के खंभे भी नही लगे हुए है जिसकी वजह से बड़े बड़े तारों को दीवारों के सहारे या मकानों के छज्जों में लगे कुंडों के सहारे जोड़ा हुआ है जिसमे विद्युत विभाग के किसी बड़े घोटाले की भी अंदेशा नजर आता है क्योंकि अगर नियमों पर नज़र डाली जाए तो गलियों में एक उचित दूरी पर एक पोल लगाना होता है पर इस क्षेत्र में पोल ढूंढने से भी नज़र नही आएगा.
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जिस जगह भी नज़र डाली जाए तारो का जाल नजर आते हैं.
कृष्णानगर गली नंबर 24 की निवासी महिला ने बताया कि उनकी गली में तारों के जंजाल से यहाँ के निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और डर के साये में जीने को सभी मजबूर हैं. उन्होने कहा कि जब हवाएं चलती है तो बहुत परेशानी होती है साथ ही उन्होंने संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही बताते हुए कहा कि जेई व संबंधित अधिकारी आते जरूर हैं पर आखों पर पट्टी बांधकर देख कर चले जाते हैं. कहीं न कही संबंधित अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा किसी दिन आमजन पर भारी न पड़ जाए.
शास्त्रीनगर गली नंबर 8 के निवासी व्यक्ति ने बताया कि दो साल पहले बिजली के तार डाले गए थे साथ ही तभी से ये तार ऐसे ही लटक रहे हैं. ये तार नंगे भी हैं और तभी यहाँ खंभा भी लगाया गया था पर संबंधित अधिकारियों की लापरवाही की वजह से इतनी भी जहमत नही उठाई गई कि इन तारों को खंभे से बांध दिया जाए. वहीं इस संबंध में जब उप खंड अधिकारी से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने उच्चाधिकारियों पर बात टाल दी.
अब बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर इस सब के बावजूद अगर कोई बड़ी दुर्घटना घट जाती है तो इसका जिम्मेदार आखिर कौन होगा और यहाँ के निवासियों की समस्या का आखिर समाधान हो पायेगा या नही साथ ही ये भी देखने वाली बात ये भी होगी कि इस तरह के लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई होती भी है या नहीं.
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