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बिजनौर में अधिकारियों की अनदेखी के चलते प्राथमिक विद्यालय जुए व शराबखाने में तब्दील

बिजनौर| गैरजिम्मेदार आला अधिकारियों के चलते एक प्राथमिक विद्यालय जुए व शराबखाने में तब्दील हो गया है. शायद ही इससे बड़ा कोई दुर्भाग्य भारतवर्ष के लिए हो. शिक्षा का मंदिर कहा जाने वाला विद्यालय आजकल शराबियों और जुआरियों के लिए एक सुरक्षित व अच्छा स्थान बन गया है. पूरा डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी हेडमास्टर, ग्राम प्रधान व अन्य अधिकारियों ने इस बात पर गौर करना गवारा नही समझा.

दरअसल मामला कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के ग्राम दयालपुर ज्ञान का है. जहाँ गांव के बीचों बीच मंदिर के पास स्थित प्राथमिक विद्यालय की दीवार पिछले डेढ़ साल से टूटी पड़ी है. जिसकी न तो हेडमास्टर ने, न ही ग्रामप्रधान ने और न ही आलाधिकारियों न सुध लेना गवारा समझा. यहाँ प्रश्न ये है कि डीआईओएस या बीएसए अथवा अन्य अधिकारियों को दीवार गिरी होने का पूरे डेढ़ साल तक पता कैसे नही चला? क्या कोई भी अधिकारी इन विद्यालयों ओर इनमें कार्यरत शिक्षकों का कभी निरीक्षण नही करता? निरीक्षण होता तो यह शिक्षा का मंदिर जुए खाने में तब्दील न हुआ होता.
कमाल की बात ये भी है कि दीवार टूटी होने के कारण सांप , बिच्छू , आदि सौ तरह की मुसीबतें बच्चो को हानि पहुंचाने के लिए तैयार रहती है जो न हेडमास्टर की समझ मे आई और न ही ग्रामप्रधान के. वहीं आलाधिकारियों का तो कहना ही क्या! जिन्हें शासन को धोखा देने के अलावा कुछ सूझता ही नही है. गैरजिम्मेदाराना रवैय्या व भ्र्ष्टाचार के चलते ही हिंदुस्तान में कोई योजना फलीभूत नही होती है जो केवल कागजो पर ही सिमट कर रह जाती है और प्रशासन द्वारा हमेशा ही कागजो पर महल खड़े कर दिये जाते है.

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