Udayprabhat
uttrakhandदेहरादून

देहरादून की शाम में घुला सूफियाना रंग, सतिंदर सरताज ने बिखेरे सुरों से सजी देहरादून की शाम

देहरादून: राजधानी दून की वादियों में रविवार की शाम सूफियाना सुरों की मिठास घुल गई, जब मशहूर गायक, शायर और गीतकार सतिंदर सरताज ने अपने ‘हेरिटेज इंडिया टूर 2025-26’ के तहत परेड ग्राउंड में यादगार प्रस्तुति दी। हजारों संगीत प्रेमियों की मौजूदगी में सजी इस महफिल ने दून की फिजाओं को आध्यात्मिक और भावनात्मक रंगों से भर दिया।

श्री दरबार साहिब में मत्था टेककर की शुरुआत

देहरादून पहुंचने पर सरताज ने सबसे पहले श्री दरबार साहिब में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। गुरु रामराय को नमन करते हुए उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की और सिख गुरुओं को स्मरण कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक स्पर्श दिया।

उन्होंने विश्व में चल रहे युद्धों को मानवता के लिए त्रासदी बताते हुए मासूमों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त की। सरताज ने कहा, “हर इंसान के अंदर एक फकीर होता है, बस जरूरत है उसे पहचानने की।” उनकी यह विनम्रता और विचारशीलता दर्शकों के दिलों को छू गई।

सूफियाना सुरों में डूबा परेड ग्राउंड

परेड ग्राउंड में सजी इस भव्य शाम में सरताज ने अपने लोकप्रिय गीतों से महफिल को चरम पर पहुंचा दिया।
‘अपने ते रंग चढ़ाई… साईं’ – भावपूर्ण प्रस्तुति पर तालियों की गूंज देर तक सुनाई दी।
‘शरबत हो गई आज सहस्रधारा वे…’ – गीत में मसूरी और कैंपटी फॉल का जिक्र कर उन्होंने स्थानीय दर्शकों से खास जुड़ाव बनाया।
‘सबसे महंगी होंदी है मासूमियत…’ – युवाओं के बीच यह गीत खासा लोकप्रिय रहा।
‘दिल सुकून वाला नहीं कठोर हो गया…’ – इस प्रस्तुति ने माहौल को भावुक कर दिया।
और जब उन्होंने ‘एक प्यार का नगमा है…’ गाया, तो पूरा मैदान सुरों में एकसाथ झूम उठा।

हर उम्र के दर्शकों में दिखा उत्साह

युवाओं से लेकर वरिष्ठ संगीत प्रेमियों तक, हर वर्ग में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। देर रात तक पंजाबी और सूफियाना गीतों पर लोग झूमते रहे। सरताज के गहरे बोल, शास्त्रीय संगीत की छाप और सूफी अंदाज ने कार्यक्रम को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया।  देहरादून की यह शाम लंबे समय तक दूनवासियों की यादों में महकती रहेगी—मानो सच में सहस्रधारा का पानी आज सुरों का शरबत बन गया हो।

Leave a Comment