देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में बीते एक महीने से उबाल बना हुआ है। विपक्षी दलों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों द्वारा सीबीआई जांच की मांग किए जाने से सरकार और सत्तारूढ़ भाजपा दबाव में नजर आ रही है। इसी राजनीतिक घमासान के बीच मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं प्रेसवार्ता कर सरकार का पक्ष रखने जा रहे हैं।
हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम को लेकर उठा विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। विपक्ष प्रदेश के सभी जिलों में प्रदर्शन कर सरकार पर सवाल खड़े कर रहा है। भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर से जुड़े वायरल ऑडियो और वीडियो सामने आने के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है, जिससे भाजपा संगठन में भी खलबली मची हुई है।
इससे पहले भाजपा की ओर से विधायक खजान दास, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने अलग-अलग प्रेसवार्ताएं कर सरकार और संगठन का पक्ष रखने का प्रयास किया, लेकिन पत्रकारों के सवालों के सामने स्पष्ट जवाब न दे पाने के कारण विवाद और गहराता चला गया।
वहीं, अंकिता भंडारी केस में नाम जोड़े जाने के बाद भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि याचिका दायर की है। इसके साथ ही देहरादून के डालनवाला थाने में बीएनएस और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामले का असर भाजपा संगठन पर भी पड़ा है। सीबीआई जांच की मांग को लेकर पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़, पूर्व राज्य मंत्री भगत राम कोठारी और ऋषिकेश से भाजपा युवा मोर्चा के जिला मंत्री अंकित बनखंडी ने पार्टी पदों से इस्तीफा दे दिया है।
प्रदेशभर में जारी विरोध-प्रदर्शनों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच मुख्यमंत्री धामी की प्रेसवार्ता को बेहद अहम माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि सीएम इस दौरान सीबीआई जांच को लेकर कोई बड़ा फैसला सुना सकते हैं, हालांकि इसकी स्थिति प्रेसवार्ता के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
