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विजय हजारे ट्रॉफी: ‘हिटमैन’ रोहित शर्मा को गोल्डन डक पर आउट कर छाए उत्तराखंड के देवेंद्र

देहरादून/जयपुर। विजय हजारे ट्रॉफी 2024-25 में उत्तराखंड भले ही मुंबई के खिलाफ मुकाबला हार गया हो, लेकिन इस मैच ने उत्तराखंड क्रिकेट को एक नया सितारा जरूर दे दिया है। बागेश्वर के तेज गेंदबाज देवेंद्र सिंह बोरा ने भारतीय टीम के कप्तान और ‘हिटमैन’ रोहित शर्मा को गोल्डन डक पर आउट कर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में 26 दिसंबर (शुक्रवार) को खेले गए इस मुकाबले में मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवरों में 330 रन बनाए। जवाब में उत्तराखंड की टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए 280 रन ही बना सकी और मुकाबला हार गई। हालांकि, नतीजे से ज्यादा चर्चा देवेंद्र सिंह बोरा की ऐतिहासिक गेंद की रही।

 पहले ही ओवर में झटका

उत्तराखंड की ओर से पारी का पहला ओवर लेकर आए राइट आर्म फास्ट बॉलर देवेंद्र सिंह बोरा ने पांचवीं गेंद पर रोहित शर्मा को चौंका दिया। हल्की बाउंसर पर रोहित स्क्वायर लेग की दिशा में कैच दे बैठे और बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। इस विकेट के साथ ही स्टेडियम में सन्नाटा छा गया और देवेंद्र रातोंरात सुर्खियों में आ गए।

देवेंद्र सिंह बोरा वर्ष 2019 से क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि टीम के कोच मनीष झा और एसोसिएशन के सचिव महिम वर्मा का उन्हें लगातार मार्गदर्शन और सहयोग मिलता रहा है।
इससे पहले देवेंद्र ने उत्तराखंड प्रीमियर लीग में देहरादून वॉरियर्स की ओर से भी खेला था। भले ही शुरुआती सीजन में उन्हें बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन कड़ी मेहनत का असर अब साफ नजर आ रहा है। इसी सीजन के रणजी ट्रॉफी मुकाबले में उन्होंने 6 विकेट झटककर अपनी क्षमता साबित की थी।

पहाड़ से निकला संघर्ष का सितारा

बागेश्वर जिले की बागेश्वर तहसील के गांव छतीना से ताल्लुक रखने वाले देवेंद्र का सफर आसान नहीं रहा। एक गरीब किसान परिवार में जन्मे देवेंद्र के पिता बलवंत सिंह बोरा किसान हैं, जबकि मां नेमा देवी गृहणी हैं।
उनकी शुरुआती पढ़ाई मंडल शेरा इंटर कॉलेज, बागेश्वर से हुई। आर्थिक तंगी के चलते देवेंद्र ने अपने संघर्ष के दिनों में सूरत (गुजरात) में 6 महीने तक ज्वेलरी शॉप में नौकरी भी की।

कोच को दिया श्रेय

देवेंद्र सिंह बोरा अपने प्राथमिक कोच हैरी कर्मयाल को अपनी सफलता का श्रेय देते हैं। उनका कहना है कि कोच हैरी कर्मयाल ने ही उन्हें शुरुआती दौर में क्रिकेट के लिए तैयार किया और मुश्किल समय में हौसला बनाए रखने की प्रेरणा दी।

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