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शादी का झांसा देकर नाबालिग से दुष्कर्म, अदालत से सुनाई दोषी को 20 वर्ष का कठोर कारावास

देहरादून: नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अर्चना सागर की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, साथ ही राज्य सरकार को पीड़िता को एक लाख रुपये का प्रतिकर देने का आदेश दिया है।

मामले के अनुसार, 17 अप्रैल 2019 को पटेल नगर कोतवाली क्षेत्र निवासी एक महिला ने अपनी 17 वर्षीय बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने बताया कि उसकी बेटी घर से सामान लेने निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। पुलिस जांच में सामने आया कि कुछ समय पहले उनके घर में किराए पर रहने वाला सनी उर्फ सोनू किशोरी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था।

जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि आरोपी किशोरी को पहले हरिद्वार और फिर मेरठ ले गया, जहां एक मंदिर में शादी का नाटक रचाया गया। इसके बाद दोनों गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित एक हॉस्टल में लगभग सवा महीने तक पति-पत्नी के रूप में रहे। हॉस्टल संचालक मोहित शर्मा ने अदालत में गवाही देते हुए बताया कि आरोपी ने किशोरी को अपनी पत्नी बताकर कमरा किराए पर लिया था।

विशेष लोक अभियोजक अल्पना थापा ने बताया कि सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने पूर्व बयानों से आंशिक रूप से मुकर गई और कहा कि वह अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी। हालांकि, अदालत ने स्कूल रिकॉर्ड (टीसी) और चिकित्सीय साक्ष्यों के आधार पर यह सिद्ध माना कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 17 वर्ष थी।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिग की सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं होता। इसके आधार पर आरोपी सनी उर्फ सोनू निवासी हस्तिनापुर, मेरठ को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।

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