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उत्तराखंड में 4300 अतिथि शिक्षकों को झटका, छुट्टियों में नहीं मिलेगा वेतन… 2018 का शासनादेश लागू

देहरादून: उत्तराखंड के माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत 4300 से अधिक अतिथि शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सर्दी और गर्मी की लंबी छुट्टियों के दौरान उन्हें कोई मानदेय नहीं दिया जाएगा। विभाग ने वर्ष 2018 में जारी शासनादेश का हवाला देते हुए सभी जिलों को इसके कड़ाई से पालन के निर्देश जारी कर दिए हैं।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने आदेश जारी करते हुए कहा कि अतिथि शिक्षकों को केवल विद्यालय संचालन अवधि के दौरान ही मानदेय देय होगा। शासनादेश में स्पष्ट प्रावधान है कि अवकाश अवधि में भुगतान की अनुमति नहीं है। निदेशालय के इस फैसले के बाद जिलों में स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है। बताया जा रहा है कि कुमाऊं मंडल के अपर निदेशक समेत विभिन्न जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों ने छुट्टियों के मानदेय को लेकर मुख्यालय से स्पष्टीकरण मांगा था। हालांकि, अब जारी आदेश के बाद अवकाश अवधि में भुगतान की उम्मीद खत्म हो गई है।

मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव लंबित

अतिथि शिक्षक लंबे समय से मानदेय 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 40 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। यह प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है, लेकिन अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। ऐसे में छुट्टियों का वेतन बंद होने से शिक्षकों में असंतोष बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

विषयविहीन तैनाती पर भी कार्रवाई

विभागीय समीक्षा में सामने आया कि कुछ विद्यालयों में ऐसे प्रवक्ता तैनात हैं, जिनके विषय से संबंधित छात्र ही मौजूद नहीं हैं। इस स्थिति को देखते हुए टिहरी, पौड़ी और पिथौरागढ़ जिलों में 18 प्रवक्ताओं को अन्य विद्यालयों में समायोजित किया गया है।

अतिथि शिक्षकों का कहना है कि सीमित मानदेय में पहले ही आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। छुट्टियों के भुगतान पर रोक से उनकी आर्थिक स्थिति और प्रभावित होगी। शिक्षक संगठनों ने संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे को शासन स्तर पर उठाएंगे।
फिलहाल शिक्षा विभाग के आदेश के बाद स्पष्ट है कि अतिथि शिक्षकों को केवल कार्यकाल के दौरान ही मानदेय मिलेगा।

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