देहरादून: उत्तराखंड में लंबित मांगों को लेकर डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने सोमवार को राजधानी में शक्ति प्रदर्शन किया। गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों से बड़ी संख्या में पहुंचे अभियंताओं ने रैली निकालते हुए सचिवालय की ओर कूच किया। हालांकि पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को सचिवालय पहुंचने से पहले ही रोक दिया।
महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने कहा कि वर्ष 2006 से चली आ रही वेतन विसंगतियों का अब तक समाधान नहीं किया गया है। उनका कहना है कि डिप्लोमा इंजीनियरों के लिए प्रारंभिक ग्रेड पे 4600 रुपये निर्धारित किए जाने की मांग लंबे समय से लंबित है, लेकिन शासन स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
महासंघ के अनुसार, प्रदेशभर से चार हजार से अधिक अभियंताओं ने रैली में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि 10, 16 और 26 वर्ष की सेवा पूरी होने पर समयबद्ध पदोन्नति और उसके अनुरूप वेतनमान सुनिश्चित किया जाए।
महासंघ के महासचिव वीरेंद्र गोसाईं ने आरोप लगाया कि कर्मचारी संगठन होने के बावजूद उनकी आवाज को अनसुना किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक जनवरी 2014 के बाद नियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं को 10 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर 5400 रुपये ग्रेड पे का लाभ नहीं दिया जा रहा, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।
महासंघ ने एक अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त अभियंताओं को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने, विभागों में पदोन्नति अनुपात में सुधार, फील्ड में कार्यरत अभियंताओं के लिए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी कार्यों में राजनीतिक व प्रशासनिक हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग भी दोहराई।
इसके अलावा उत्तराखंड के पेयजल विभागों के एकीकरण और बाहरी कार्यदायी संस्थाओं पर नियंत्रण की भी मांग उठाई गई।
महासंघ पदाधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो उच्चाधिकार समिति की बैठक बुलाकर आंदोलन के दूसरे चरण की घोषणा की जाएगी।
