दिल्ली हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 24 घंटे की डेडलाइन दी
नई दिल्ली: अंकिता भंडारी हत्याकांड में भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम का नाम जोड़कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे वीडियो और कंटेंट को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने गौतम को राहत देते हुए संबंधित सभी वीडियो और पोस्ट 24 घंटे के भीतर हटाने के निर्देश दिए हैं।
मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि तय समयसीमा के भीतर कंटेंट नहीं हटाया गया, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्वयं कार्रवाई करते हुए ऐसे वीडियो डिलीट करेंगे।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि भविष्य में यदि ऐसा कोई कंटेंट दोबारा अपलोड किया जाता है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इसकी जानकारी याचिकाकर्ता को देंगे, ताकि वह कानूनी कदम उठा सकें।
सुनवाई के दौरान दुष्यंत गौतम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि सोशल मीडिया के जरिए जानबूझकर याचिकाकर्ता की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है, जिसमें राजनीतिक दलों से जुड़े अकाउंट भी शामिल हैं।
अंकिता केस में कभी नहीं आया गौतम का नाम
भाटिया ने कोर्ट को अवगत कराया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में न तो जांच के दौरान और न ही ट्रायल के समय दुष्यंत गौतम का नाम सामने आया। ट्रायल कोर्ट इस मामले में अपना फैसला भी सुना चुकी है।
याचिका में कहा गया कि दुष्यंत गौतम लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और झूठे वीडियो के कारण उन्हें गंभीर सामाजिक और राजनीतिक बदनामी का सामना करना पड़ा है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
24 दिसंबर 2025 को वायरल हुआ था विवादित वीडियो
बताया गया कि 24 दिसंबर 2025 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया गया था, जिसमें दुष्यंत गौतम का नाम अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़कर एक भ्रामक नैरेटिव गढ़ा गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।
मानहानि रोकने के लिए HC की सख्त कार्रवाई
